परमेश्वर के वचन पर मनन करो
मनन करने के बहुत से अलग-अलग तरीके हैं। यह विधि हर पद को क्रम से जाँचती है, ताकि
यह दिखाई दे कि उसका सम्बन्ध किससे है: पाप, जिन्हें मान लेना है या जिनसे बचना है;
परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ; उदाहरण, जिनका अनुसरण करना है; आज्ञाएँ, जिनका पालन करना है; और
ज्ञान, जो हम परमेश्वर के विषय में पा सकते हैं।
बाइबल के तीन अलग-अलग स्थान हमें बताते हैं कि हम अपने हर काम में कैसे
आशीषित और सफल हो सकते हैं:
“क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो दुष्टों की योजना पर नहीं चलता,
और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता;
और न ठट्ठा करनेवालों की मण्डली में बैठता है!
परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता;
और उसकी व्यवस्था पर रात-दिन ध्यान करता रहता है।
वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती पानी की धाराओं के किनारे लगाया गया है
और अपनी ऋतु में फलता है,
और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं।
और जो कुछ वह पुरुष करे वह सफल होता है।”
भजन संहिता 1:1-3
“व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए,
इसी में दिन-रात ध्यान दिए रहना,
इसलिए कि जो कुछ उसमें लिखा है उसके अनुसार करने
की तू चौकसी करे;
क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे,
और तू प्रभावशाली होगा।”
यहोशू 1:8
“पर जो व्यक्ति स्वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है,
वह अपने काम में इसलिए आशीष पाएगा
कि सुनकर भूलता नहीं,
पर वैसा ही काम करता है।”
याकूब 1:25
हर एक पद में मुख्य बात यह है कि हम परमेश्वर के वचन पर मनन करें, ताकि उसमें जो कुछ लिखा है,
उस सब के अनुसार करें।
इन पदों से स्पष्ट है: यदि हम अपने हर काम में आशीषित और सफल होना चाहते हैं,
तो हमें परमेश्वर के वचन पर मनन करना होगा। मनन करने की एक अच्छी, बाइबल-आधारित
विधि यह है:
बाइबल का कोई एक पद चुनो। उसे अपने शब्दों में लिखो, उसे
कंठस्थ करो, और फिर प्रार्थना सहित नीचे दिए गए हर प्रश्न पर विचार करो:
1. पाप
– क्या कोई पाप हैं जिनसे बचना है?
“सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश,
और समझाने,
और सुधारने,
और धार्मिकता की शिक्षा के लिये लाभदायक है,
ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने,
और हर एक भले काम के लिये तत्पर हो जाए।”
2 तीमुथियुस 3:16-17
2. प्रतिज्ञाएँ
– क्या कोई प्रतिज्ञाएँ हैं जिनका दावा करना है?
“जिनके द्वारा उसने हमें बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएँ दी हैं
ताकि इनके द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूटकर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है,
ईश्वरीय स्वभाव के सहभागी हो जाओ।”
2 पतरस 1:3-4
3. उदाहरण
– क्या कोई उदाहरण हैं जिनका मैं अनुसरण कर सकूँ?
“तुम मेरी जैसी चाल चलो जैसा मैं मसीह के समान चाल चलता हूँ।”
1 कुरिन्थियों 11:1
“क्योंकि तुम आप जानते हो, कि किस रीति से हमारी सी चाल चलनी चाहिए…
पर इसलिए कि अपने आपको तुम्हारे लिये आदर्श ठहराएँ, कि तुम हमारी सी चाल चलो।”
2 थिस्सलुनीकियों 3:7-9
4. आज्ञाएँ
– क्या कोई आज्ञाएँ हैं जिनका मुझे पालन करना है? यीशु यूहन्ना 14:21 में कहता है:
“जिसके पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है,
वही मुझसे प्रेम रखता है,
और जो मुझसे प्रेम रखता है,
उससे मेरा पिता प्रेम रखेगा,
और मैं उससे प्रेम रखूँगा,
और अपने आपको उस पर प्रगट करूँगा।”
यूहन्ना 14:21
5. ज्ञान
– क्या परमेश्वर के विषय में कुछ सीखने को है?
“परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा
अनुग्रह और शान्ति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए।”
2 पतरस 1:2-3
ध्यान दो कि अंग्रेज़ी में इन पाँच बातों से याद रखने का शब्द “SPECK” बनता है
(Sin/पाप, Promises/प्रतिज्ञाएँ, Examples/उदाहरण, Commands/आज्ञाएँ, Knowledge/ज्ञान)।
प्रार्थना सहित पिछले प्रश्नों पर विचार करने के बाद: परमेश्वर ने तुम्हें जो दिखाया है,
उसके प्रति तुम्हारा व्यावहारिक प्रत्युत्तर क्या है? क्योंकि मुख्य बात यही है कि वचन पर मनन करें,
ताकि जो वह कहता है, उसके अनुसार करें। याकूब कहता है “परन्तु वचन पर
चलनेवाले बनो, और केवल सुननेवाले ही नहीं…” (याकूब 1:22)
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