यह महत्त्वपूर्ण है कि हमारे पास एक नोटबुक हो, जिसमें हम वह लिखें जो परमेश्वर हमें दिखाता है, ताकि हम बाद में उस पुस्तक को देखकर उसे स्मरण कर सकें।
परमेश्वर ने यिर्मयाह से कहा “…पटिया पर खोद…” और “…पुस्तक में लिख…”, और इसका कारण यह था: “…कि वह भविष्य के लिये… साक्षी बनी रहे…”।
इस वचन से हम जानते हैं कि लिखने का उद्देश्य भविष्य है। हम बातें इसलिए लिखते हैं कि कोई – चाहे हम स्वयं या कोई और – उन बातों को बाद में, किसी आनेवाले समय में, पढ़ सके।
तब अमालेकी आकर रपीदीम में इस्राएलियों से लड़ने लगे। तब मूसा ने यहोशू से कहा, “हमारे लिये कई एक पुरुषों को चुनकर छाँट ले, और बाहर जाकर अमालेकियों से लड़; और मैं कल परमेश्वर की लाठी हाथ में लिये हुए पहाड़ी की चोटी पर खड़ा रहूँगा।” मूसा की इस आज्ञा के अनुसार यहोशू अमालेकियों से लड़ने लगा; और मूसा, हारून, और हूर पहाड़ी की चोटी पर चढ़ गए। और जब तक मूसा अपना हाथ उठाए रहता था तब तक तो इस्राएल प्रबल होता था; परन्तु जब जब वह उसे नीचे करता तब-तब अमालेक प्रबल होता था। और जब मूसा के हाथ भर गए, तब उन्होंने एक पत्थर लेकर मूसा के नीचे रख दिया, और वह उस पर बैठ गया, और हारून और हूर एक-एक ओर में उसके हाथों को सम्भाले रहे; और उसके हाथ सूर्यास्त तक स्थिर रहे। और यहोशू ने अनुचरों समेत अमालेकियों को तलवार के बल से हरा दिया। तब यहोवा ने मूसा से कहा, “स्मरणार्थ इस बात को पुस्तक में लिख ले और यहोशू को सुना दे कि मैं आकाश के नीचे से अमालेक का स्मरण भी पूरी रीति से मिटा डालूँगा।” तब मूसा ने एक वेदी बनाकर उसका नाम ‘यहोवा निस्सी’ रखा; और कहा, “यहोवा ने शपथ खाई है कि यहोवा अमालेकियों से पीढ़ियों तक लड़ाई करता रहेगा।”
निर्गमन 17:8-16
जब युद्ध समाप्त हो गया और यहोशू विजयी हुआ, तब लिखा है:
यह विचार मूसा का नहीं, बल्कि परमेश्वर का था। परमेश्वर चाहता था कि यह विजय एक पुस्तक में दर्ज की जाए, ताकि बाद में उसे फिर से स्मरण किया जा सके।
व्यवस्थाविवरण 7:17-19 में हम देखते हैं कि ऐसा स्मरण कैसे उपयोग में आता है (यह स्मरण करने के लिए कि यहोवा ने क्या किया है):
यदि तू अपने मन में सोचे, कि वे जातियाँ जो मुझसे अधिक हैं; तो मैं उनको कैसे देश से निकाल सकूँगा? तो भी उनसे न डरना, जो कुछ तेरे परमेश्वर यहोवा ने फ़िरौन से और सारे मिस्र से किया उसे भली भाँति स्मरण रखना। जो बड़े-बड़े परीक्षा के काम तूने अपनी आँखों से देखे, और जिन चिन्हों, और चमत्कारों, और जिस बलवन्त हाथ, और बढ़ाई हुई भुजा के द्वारा तेरा परमेश्वर यहोवा तुझको निकाल लाया, उनके अनुसार तेरा परमेश्वर यहोवा उन सब लोगों से भी जिनसे तू डरता है करेगा।
व्यवस्थाविवरण 7:17-19
परमेश्वर ने लोगों को आज्ञा दी कि वे अपने शत्रुओं से न डरें, बल्कि इसके बदले स्मरण करें कि परमेश्वर उनके लिए पहले ही क्या कर चुका है, और विश्वास में उत्साहित हों। लिखी हुई बातें उन्हें स्मरण करने में सहायता करतीं।
इन वचनों से हम विश्वास करते हैं कि यह परमेश्वर की ओर से और हमारे भले के लिए है कि हम एक पुस्तक में ये बातें लिखें:
इसलिए एक नोटबुक लो, और जब तुम प्रतिदिन परमेश्वर से मिलते हो, तो जो कुछ वह तुम पर प्रगट करता है, उसे लिखना आरम्भ करो, और बाद में उसे फिर से स्मरण करो।
यह दशकों तक कैसे जिया गया, इसके उदाहरणों के लिए psalm10218.com (अंग्रेज़ी में) देखो, जो एक व्यक्ति की 25 से अधिक वर्षों की शान्त समय की नोटबुकों का संग्रह है।